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Monday, 17 August 2026

नरेन्दर सरेंडर

 कुछ दिन पहले अपनी फेसबुक वॉल पर सिर्फ दो शब्द लिखे थे "नरेंदर सरेंडर!" मित्रों ने मेरी खाल ही उधेड़ दी। किसी ने इसे सैक्रिफाईस कहा, किसी ने कहा कि शेर दो कदम पीछे हटा है, तो कोई मोदी को तानाशाह घोषित करवाने का इल्जाम देने लगा! मोदी जी जब देश के प्रधानमंत्री नहीं थे तो हमारे क्षेत्र के बुजुर्ग और बड़े कम्युनिस्ट नेता मोदी के आने की संभावना पर कसमसा रहे थे। मैंने कहा, मोदी ही आना चाहिए क्योंकि इस देश को एक तानाशाह की जरूरत है और मोदी में वो गुण हैं! इस पर वह मुस्कुराए और बोले कि जब तानाशाह ही कह दिया तो मैं क्या कहूं! वैसे किसी कम्युनिस्ट का तानाशाही की शिकायत करने पर मुझे समझ नहीं आता कि इसे गाड़ी में जोड़ूं या हल में! हालांकि मेरा दृढ़ता से मानना है कि सहृदय तानाशाही (benevolent despotism) सरकार का सर्वोत्तम प्रारूप है और लेखनी पर अपने अधिकार की धौंस जमाते हुए मैं इसे रामराज कहता हूं! हालांकि नरेंद्र मोदी इस से अभी कई प्रकाश वर्ष दूर हैं। 

विदुर जी ने कहा है -

न देवा दण्डमादाय रक्षन्ति पशुपालवत्।

यं तु रक्षितुमिच्छन्ति बुद्ध्या संविभजन्ति तम् ॥

अर्थात् -

 ईश्वर किसी की रक्षा चरवाहे की तरह हाथ में लाठी लेकर नहीं करते। वे जिस की रक्षा करना चाहते हैं, उसे उत्तम बुद्धि, सही समझ और आंतरिक सामर्थ्य प्रदान कर देते हैं। 

मोदी जी बार बार अपने समर्थकों को बताना चाहते हैं कि वे ईश्वर का अवतार हैं। किन्तु समस्या तो उनके समर्थकों में है, जिनको लगता है कि उनकी रक्षा करने ईश्वर दोनों हाथों में तलवार लेकर घोड़े पर बैठकर ही आएंगे। मोदी जी बार बार इशारा करते हैं कि आंदोलन कैसा हो पर समर्थक....! वो यूजीसी पर आवाज उठाते हैं, कमज़ोर सी, और फुस्स! अभी वो आरक्षण हटाने को लामबंद होने का कार्यक्रम बना रहे हैं जिस के असफल होने की अग्रिम भविष्यवाणी मैं कर ही देता हूं। एससी एसटी कानून पर सर्वोच्च न्यायालय का न्यायपूर्ण फैसला निरस्त करने के लिए आंदोलन होता है! जबरदस्त!... तोड़फोड़ वाला! जय भीम - जय भीम! और मोदी जी सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ताक पर रखकर उस कानून को और कठोर बना देते हैं तथा मंच से कहते हैं कि पहले एससी एसटी कानून में 22 अपराधों में सजा होती थी जिनकी संख्या बढ़ा कर हमने 47 कर दी है! मोदी जी का साफ संकेत है कि किस प्रकार के आंदोलन को उनकी सरकार महत्व देती है। मोदी जी का समर्थक नादान है, वह इशारा नहीं समझता और मोदी जी को इतना पता है कि वह इस में मास्टर स्ट्रोक खोज ही लेगा! समझ जाएगा कि शेर एक कदम पीछे हटा है! आज भगवान राम को गाली देने से किसी का कुछ नहीं बिगड़ता किन्तु अंबेडकर को कुछ कह दिया तो आप जेल में होंगे! एससी एसटी एक्ट अब ब्लासफेमी कानून है! 

किसान कानूनों की आड़ में दिल्ली साल भर जाम, लाल किले पर खालिस्तानी हमला और कानूनों की वापसी! मोदी जी का इशारा कि ये है आंदोलन! समर्थक अब भी सोच रहे कि शेर एक कदम पीछे हटा!

जंतर मंतर पर भीड़, माता भगिनी की गालियां, सनातन धर्म को कोसा-काटी, इंशा अल्लाह - इंशा अल्लाह, वामपंथी ढपली, आतंकियों के समर्थन में नारे, जै जै जै जै, जै भीम- जै भीम! मोदी जी 20 दिन तक धर्मेंद्र प्रधान को छिपा कर रखते हैं और फिर अचानक प्रधानी छीन लेते हैं। मोदी जी फिर दिखाते हैं कि आंदोलन कैसा होना चाहिए और समर्थक फिर उनकी अपेक्षा पर खरे नहीं उतरते। 

वैसे प्रधान का इस्तीफ़ा तो यूजीसी विवाद के दौरान ही तय हो गया था किंतु मोदी जी भली भांति समझते हैं कि नासमझ समर्थकों के लिए खालीपीली अपने सेनापति की बलि देने का कोई औचित्य नहीं! वे मौके का इंतजार करते हैं! मोदी जी वह ग्राहक हैं जो रेस्टोरेंट में जाता है और कुछ गरमा गरम लाने का आदेश देता है। वेटर समोसे लाता है, ग्राहक रिजेक्ट कर देता है, फिर पकोड़े लाता है, पूरी लाता है, ग्राहक संतुष्ट नहीं! बेचारा वेटर अंत में भट्टी से लाल सुलगते अंगारे निकाल कर प्लेट टेबल पर टिका देता है। किंतु ग्राहक तो मोदी जी है, वो जेब से सिगरेट निकालता है, सुलगाता है और कश लेते हुए निकल लेता है। मोदी जी ने कॉक्रोच निपटा दिए और राहुल गांधी भी, साथ में प्रधान का जोरदार स्वागत भी करवा दिया! एक आंदोलन का खत्म होना असंतोष का सेफ्टी वाल्व रिलीज होने जैसा है। दीपके कह रहा है 2.0, पर पहले ही दिन पिटेगा! 

वैसे मोदी जी को अपने समर्थकों से अधिक भरोसा राहुल गांधी पर है। उन्हें पता है कि राहुल गांधी कुछ भी कर ले, लेकिन अंत में बनी बनाई खीर में धूल डाल ही देगा। उसके लिए वो अमित शाह को पूरे सत्र संसद में नहीं आने देते, और अंत में राहुल गांधी वही करते है जो मोदी जी चाहते हैं। रही सही कसर संदीप दीक्षित की मदद से पूरी हो जाती है। यकीन मानिए राहुल गांधी नाम का इंसान मोदी जी के लिए वरदान है।

राहुल गांधी जितना भरोसा मोदी जी को समर्थकों की उस विशेषता पर है कि वो निकम्मे कुछ नहीं करेंगे! पर मोदी जी तो अवतार हैं, करना तो है! अतः मोदी जी सभी काम घुमाकर करते हैं। कुछ दिन पहले मेरे चचेरे भाई के मकान पर टाइल लगाने वाला एक राज मिस्त्री उससे पैसा एडवांस ले गया और काम भी नहीं किया। खोजबीन करके उसका पता लगाया तो उसने आने के बजाय SC ST एक्ट के तहत उसके खिलाफ झूठी शिकायत दे दी! जबकि मिस्त्री मध्य प्रदेश का था तो उसकी जाति क्या है यह किसी को पता ही नहीं था। खैर, उसने शिकायत वापस लेने की एवज में और रुपये लिए। उसके बाद भतीजे ने कसम खा ली कि आइंदा किसी एससी/एसटी को काम पर नहीं रखेगा। अब मोदी जी का अगला प्लान यहीं से निकलेगा ऐसा लगता है! मोदी जी को भी पता है कि एससी एसटी कानून का दुरुपयोग होता है। उन्हें बस इसको हटाने का रास्ता निकालना है। हो सकता है वो सैंतालीस की जगह इस एक्ट में सौ प्रावधान कर दें, हो सकता है कि एससी एसटी के व्यक्ति की तरफ देखने पर भी जेल होने लगे! लोग उन्हें आता देख कर घर में छिपने लगें! फिर मोदी जी की योजनानुसार स्वयं अनुसूचित जाति के लोग मांग उठाएंगे कि एससी एसटी एक्ट समाप्त कर दिया जाए।


अरे समर्थकों सब मोदी जी नहीं करेंगे जो गलत हो उस का विरोध करने लगो ताकि मोदी को भी आसानी हो!


वंदे मातरम्!

राकेश चौहान 

#RSC 

Friday, 3 April 2026

महिला दिवस

 

यह पोस्ट एक प्रकार से पुरुष दिवस पर लिखी मेरी पोस्ट का महिला दिवस का भाग है, इस लिंक पर क्लिक करके पुरुष दिवस की उपरोक्त पोस्ट पढ़ सकते हैं

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'घोड़ी पर बेटी का बनवारा निकाला, लड़का -लड़की समान होने का संदेश दिया।' 

हर दो-चार दिन बाद ऐसी एक खबर वाट्सअप ग्रुपों में आ ही जाती है। किंतु आश्चर्य है कि यह सामानता प्रदर्शित करने के लिए बेटे को सलवार पहना कर बनवारा निकालने की एक भी खबर आज तक नहीं आई! खेल हो या राजनीति, पढ़ाई हो या नौकरी लगी हो, बेटी ने अच्छा किया तो सम्मान समारोह में पगड़ी पहना दो! किंतु आज तक किसी भी बेटे का सम्मान चुनरी पहना कर हुआ हो, मैं ने नहीं सुना। समानता या तो लड़की को घोड़ी पर बिठा कर आती है, या फिर सर पर पगड़ी रख कर! नारी के इन अभिनंदनों में नारी कहां है? महिला का अभिवादन उसे पुरुष बना कर करना उसका सम्मान है या अपमान! 

तथाकथित 'अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस' कुछ ही दिन पहले गया, कुछ महिलाओं ने मुझ से शुभकामनाएं 'छीनने' का असफल प्रयास किया। किन्तु पितृ सत्तात्मक, मनुवादी, पुरुष वर्चस्व वादी समाज में रहने वाले व्यक्ति से इस विषय में अपेक्षा ही क्या की जा सकती है! निश्चय ही हर जानने वाली महिला को महिला दिवस 'विश' करना 'कूल' होता होगा परन्तु अधिकतर 'एंपावर्ड' महिलाओं और 'कूल डूड्स' को नहीं पता कि पुरुषों के बराबर मज़दूरी और काम के घंटे कम करने की मांग करती अनेकों महिलाओं ने यूरोप के देशों में जानें गंवा कर 1915 के बाद ही महिला दिवस कमाया था। वैसे भी यूरोप ने महिलाओं को मतदान का अधिकार भी पहली बार लगभग उसी समय देना आरम्भ किया था और इस्लामी इलाके का तो कहना ही क्या! जबकि भारत में लोकतंत्र और इसमें महिलाओं की भागीदारी के प्रमाण ईसा से भी बहुत पहले के हैं। अब्राहमियों के अनुसार महिलाएं 'शैतान की बेटियां' और 'पुरुष की खेती' ही रही हैं जो उनकी धार्मिक किताबों में आज भी दर्ज़ है। रोमन साम्राज्य में गणित, खगोलीय ज्ञान और विज्ञान से चर्च के सिद्धांतों को चुनौती देने वाली महिला विद्वान हिपेशिया को यातनाएं दे कर मार दिया गया था जबकि भारत में उस से हजारों साल पहले अपाला, लोपामुद्रा, गार्गी, अरुंधती, घोषा जैसी विदुषी नारियां वेदों की ऋचाएं तक लिख रही थीं। आदि शंकराचार्य तथा मंडन मिश्र के शास्त्रार्थ की न्यायधीश मंडन मिश्र की विदुषी पत्नी भारती ने 42 दिन चले शास्त्रार्थ के बाद तटस्थ न्याय के सिद्धांतों का पालन करते हुए आदि शंकराचार्य को विजेता घोषित किया था किंतु उन के मंडन मिश्र की अर्धांगिनी यानि स्वयं को भी हराने के बाद ही। अर्थात पत्नी की हार के बिना पति की हार भी अधूरी ही थी। यह घटना किसी नारी के विद्वती होने का प्रमाण ही नहीं अपितु भारत के सामाजिक मूल्यों और महिला की श्रेष्ठ स्थिति तथा उसकी न्याय प्रियता की झलक भी है। दाम्पत्य, विद्वता, संस्कार, न्याय और नारी शक्ति का ऐसा एक भी उदाहरण वहां नहीं मिलता जहां महिला दिवस गढ़ा गया।

वामपंथी का मूल हथियार है कि वह समाज के अंदर दो वर्ग पैदा करता है फिर उनमें दरार बनता है एक वर्ग को शोषक और दूसरे को शोषित प्रदर्शित करता है तथा उस दरार को बढ़ाता है। यह कहीं उद्योगपति तथा मजदूर, कहीं उच्च जाति निम्न जाति, कहीं अफसर कर्मचारी, कहीं महिला पुरुष, कहीं पति-पत्नी और यहां तक कि कहीं अभिभावक तथा संतान के रूप में कुछ भी हो सकता है।

महिला से भेदभाव और उसको समाप्त करने के महिला दिवस जैसे चोंचले दोनों ही भारत को मिली पाश्चात्य भेंट हैं और महिलाओं को पुरुष बना कर बराबरी का ढोंग करने वाले वामपंथ के मासूम औजार!